एक रात मेरे ही एक पेंटिंग से
सारे किरदारों ने मुझे पूछा
भाई कलाकार , तुम सोचते कुछ हो
और , बनाते कुछ और ,
ऐसा क्यूँ ?
मैंने कुछ नही बोला
,अगले दिन
मेरे पेंटिंग से सारे किरदार
फरार ....
आज कल में ,
जो पेंटिंग करता हु वही सोचता हूँ . . .
Thursday, December 11, 2008
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1 comment:
बहुत बढिया!!!
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